Wednesday, September 16, 2009

ये एक शव्द वाले टिप्पणी बाज

ब्लॉग की दुनिया बड़ी रोचक और कुछ विचित्र भी है. यहाँ श्रेष्ठतम भी लिखा जा रहा है, और कचरा भी परोसा जा रहा है.
किसी रचना पर टिप्पणी करने वाले अधिकांश चिट्ठेकार ही हैं,
कुछ चिट्ठेकार ऐसे भी हैं जो रचनाएं पढने की जहमत नहीं उठाते बिना पढे ही टिप्पणी टपका देते हैं.
ऐसे कुछ नमूने देखिये.....

फलां ने कहा......
उम्दा...

अमुक साहब ने कहा ....
सुन्दर.......

"क" ने कहा ....
नाइस...

वाह! , खूब! , बढ़िया!, आभार... लिखते रहिये... बधाई... सही॥ आदि शव्द ऐसी ही टिप्पणियों के नमूने हैं। असल में इन टिप्पणियों का अभिप्राय सभी समझते हैं। इन्हें अपने ब्लॉग का पता ठिकाना देना होता है, बस।

कुछ चिट्ठेकार इस ताक में रहते हैं कि चिटठा जगत में किस नए मुर्गे का आगमन हुआ ये रचनाकार की प्रोफाइल या उसने ब्लॉग पर क्या लिखा है, इसके चक्कर में नहीं पड़ते ये ब्लोगर्स केवल यू। आर. एल छोड़ने वाले होते हैं. इन्हें टिप्पणीकार नहीं बल्कि टिप्पणीबाज कहना ज्यादा सही होगा क्योंकि ये पांच मिनिट में आठ दस चिट्ठे तो निबटा ही देते होंगे.


मैं अभी मुझ जैसे ही नए ब्लोगर्स की रचनाएं पढ़ रहा था.एक टिप्पणीकार बड़े विचित्र मालुम पड़े बाकायदा दो तीन नए चिट्ठों पर उनकी टिप्पणियाँ पढने को मिलीं सभी पर उनकी टिप्पणियाँ एक जैसी थीं. हालाँकि जिस रचना पर वह टिप्पणी दे रहे थे वह काफी प्रभावपूर्ण रचना थी.
एक आकर्षक सुन्दर कविता पर उनकी टिप्पणी देखिये...

"आपने जो वर्ड वेरिफिकेशन लगा रखा है. उसे हटा दें. वर्ड टाइप करने में बड़ी परेशानी होती है... "
आगे कैसे वर्ड वेरिफिकेशन हटाया जाता है उसका पूरा विवरण था.

अब ऐसे चिट्ठेबाजों को सुन्दर, असुंदर कृति से कोई विशेष लगाव नहीं होता है. ये टिप्पणी कार सीधे टिप्पणी के बटन पर प्रहार करते हैं और देखते हैं कि वर्ड वेरिफिकेशन है की नहीं, अब यदि है, तो " तेरी ये हिम्मत! अभी मजा चखाता हूँ; खा मेरी टिप्पणी !" और पहले से सहेज कर रखी टिप्पणी को कापी किया, चिपका दिया ...!
और बेचारा नया ब्लोगर अपने सारे काम छोड़ कर वर्ड वेरिफिकेशन हटाने की गुत्थी में उलझ जाता है.....

मैं धुरंधर और लिक्खाड़ चिट्ठेकारों की बात नहीं कर रहा हूँ । नया ब्लोगर कुछ नया लिख देता है, लेकिन वह खुद कन्फ्यूज होता है.'ठीक ठाक है की नहीं यार! एक तो पहले से ही भयानक कन्फ्यूजन, दूसरे छपने के बाद टिप्पणियाँ , सुन्दर! वाह! खूब! लिखते रहिये अब ब्लोगर अपना नया पुराना सारा कचरा पाठकों के सामने परोस देता है।

ठीक है साहब! आप बहुत अच्छा लिखतें हैं । आप बहुत कुछ हैं. तो टिप्पणियों में कुछ तो लिखिए वैसे भी अपनी हिंदी भाषा में लिखने बोलने का काफी चलन है किसी पुस्तक की भूमिका का शीर्षक "दो शव्द" होता है, और लेखक दो तीन पेज भर देते हैं कोई वक्ता दो शव्द कहना चाहता है और पूरा एक घंटा ले लेता है. तो आप टिप्पणी के लिए दो चार शव्द लिखने में क्यों कंजूसी करते हैं?


यदि रचना सुन्दर है तो क्यों? यदि उसमे कुछ कमी है तो क्यों ?इस क्यों शव्द पर ही थोडा विचार विमर्स कर लीजिये वैसे यह "क्यों" शव्द बड़ा आध्यात्मिक शव्द है, इस शव्द में जीवन के बड़े भारी रहस्य छुपे हैं. इस शव्द का उत्तर खोजने में दिल और दिमाग दोनों का उपयोग करना पड़ता है.

एक शव्द की टिप्पणी देकर हम एक गलत परम्परा की शुरुआत कर रहे हैं, ब्लॉग की दुनिया के लिए शायद ये लाभदायक न हो।

हमें मालूम है कि हम सभी पाठकों लेखकों को अपनी चोखट, चौपाल पर बुलाना चाहते हैं। यह स्वाभाविक है लेकिन आमंत्रण पत्र थोडा मित्रवत हो तो क्या कहना.

एक सच्चा मित्र चापलूसी नहीं करता , वह अपने मित्र की प्रशंसा करता है. लेकिन साथ ही उसकी कमजोरियों को स्वस्थ आलोचना के साथ उसके सामने लाता है .

7 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

उम्दा...
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हा-हा-हा.. भैया जी बुरा मत मानियेगा, लेख पढ़कर बस यूँ ही शरारत करने की सूझ गई !

दिगम्बर नासवा said...

AUR KUCH HO NA HO KAM SE KAM NAYE BLOGER KO UMEED TO HOTI HAI KI KISI NE USKA BLOG DEKHA .... PADHAA YA NAHI YE TO KOI BHI NAHI BATA SAKTA .... PAR AAPNE JAROOR RISERCH KAR KE LIKHA HAI APNA LEKH JO ACHHA HAI .... AISE HI KHOJI LEKH LIKTE RAHIYE ... LIKHNE PADHNE WAALE PARIPAKV HO HI JAAYENGE ........

अविनाश वाचस्पति said...

आपने टिप्‍पणी देने वालों को कहा है बाज
पोस्‍ट लिखने वालों को क्‍या कहेंगे
क्‍या अंदाजा लगाएं जनाब।

पर यह मत कहिएगा कि
एक ही टिप्‍पणी करके कापी
दी है पेस्‍ट
इतना हम समय नहीं करते वेस्‍ट
इससे जल्‍दी तो लिखी जाती है
उनकी बात अलग है

उन्‍हें अलग अदा ही भाती है।

Dipti said...

बहुत अच्छे... :-).

अनूप शुक्ल said...

वाह टिप्पणी बाजों की खटिया कर दी। अब बिस्तरा भी गोल किया जाना चाहिये। शानदार!

रूपम said...

एक सही और जरुरी मुद्दा है, जो आपने उठाया है
क्योंकि हमारा लक्ष्य विचारों का आदान प्रदान है न की टिप्पणियों की लालसा
सभी ब्लोगेर्स को चाहिए की अपने विचारों से चाहे वे सही हो या गलत पूरी तरह से अवगत करायें नहीं तो ऐसा ही मालूम होता है जैसे जबरदस्ती के कर्तब्यों का निर्वाह किया जा रहा है .

anurag said...

रामकुमार जी सुना है गूगल की ओर से एक नयी सुविधा चुटकीबाज ब्लोगेर्स को मिलने वाली है जिसमे बिना ब्लॉग पढ़े ही कमेंट्स पोस्ट करने के लिए ३-४ विकल्प अपने आप ही आ जाया करेंगे बस चुटकी बजा कर बटन दबाइए और भाग जाइये......
पर साथ ही ये भी बताया गया है की यदि आप इस सुविधा का आनंद लेते है तो ये सुविधा आपके ब्लॉग पर भी उपलब्ध रहेगी.... निशुल्क
(जोक है हंस दीजिये )
निश्चय ही आपने जो इस ब्लॉग में लिखा है वो भडास भी है निंदा और निवेदन भी
ऑरकुट,फेसबुक जैसी सोशल नेट्वर्किंग वेबसाइट्स भी इस तरह के चलताऊ यूज़र्स के चलते अपने मूल स्वरूप को खो चुकी है
आपकी बेबाक लेखनी का ये तीखा प्रहार....... अहा