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Sunday, October 25, 2009

निस्संदेह हिंदुत्व खतरे में है!!!

हमारे देश के हिन्दू संगठन रातदिन हो हल्ला मचाते हैं, हिन्दू एक नहीं हैं. धर्म परिवर्तन करके मुसलमान या ईसाई बन रहे हैं. हिंदुत्व खतरे में है....पूछने पर कि ऐसा क्यों है? सारा दारोमदार इसलाम का प्रचार या ईसाई मिशनरियों के ऊपर थोप दिया जाता है....लेकिन हिन्दू समाज की विसंगतियों पर किसी संगठन या धर्माधिकारी का ध्यान नहीं जाता है. दूसरे धर्मों के लोग इस महान कहे जाने वाले हिन्दू समाज में दीक्षित क्यों नहीं हो रहे हैं..?

 यही प्रश्न मैंने अपने एक मित्र जो कि विश्व हिन्दू परिषद् के जिला महामंत्री हैं, के सामने रखा. लेकिन मुझे कोई समुचित उत्तर न मिलने पर मैंने उनसे कहा कि बहुत से अन्य धर्मों के लोग हैं जो कि   इस हिन्दू  धर्म में दीक्षित होना चाहते हैं, लेकिन पहले यह बताइए कि दीक्षित होने के बाद आपका विश्व हिन्दू परिषद् उन्हें किस जाति में रखेगा? आपके धर्म में शूद्र होना कोई नहीं चाहेगा क्या आप उन्हें ब्राह्मण वर्ग में जगह दे सकते हैं और कि क्या ब्राह्मण वर्ग उन्हें  ह्रदय से स्वीकार कर उनसे रोटी बेटी का सम्बन्ध स्थापित कर सकता है...? उनके उत्तर की प्रतीक्षा आज भी है मुझे...

सच तो यह है इस आधुनिक युग में भी हम कविलियाई संस्कृति से मुक्त नहीं हुए हैं 'आप ब्राह्मण, मैं भी ब्राह्मण आप कायस्थ , मैं भी कायस्थ- अब ठीक! अब ढपली ठीक बजेगी! आज भी हमारे यही विचार हैं. रेल में सफर करते हुए जब तक हम सहयात्री की जाति नहीं जान लेते हमारी आत्मा बेचैन रहती है.. और ये अनपढों की बातें नहीं शिक्षित और उच्च शिक्षित लोगों की भी यही मानसिकता है.

सभी ने अपने अपने संघ या कबीले बना रखे हैं. ब्राह्मण महापंचायत, क्षत्रिय समाज , अखिल भारतीय कायस्थ समाज,
कोरी समाज,  यादव समाज और न जाने क्या क्या...और यह सारा खेल समाज व्यवस्था के नाम पर चल रहा है.

चाहे विश्व हिन्दू परिषद् हो शिवसेना हो, बजरंग दल हो या अन्य कोई दलदल इस तरफ से सभी ऑंखें मूंदे हुए हैं, सभी लोगों के पांव जातिवाद के  कीचड में सने हैं. लोग मुसलमानों का विरोध कर रहें हैं ,लेकिन हिन्दू समाज की सडांध पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.

कट्टरवाद रूपी कैंसर से पीड़ित समूह, धर्म के नाम पर हिन्दू समाज को नालायक बनाये रखने की चाल में सफल है. उन्हें पता है कि यदि हिन्दू समाज अपनी जाति की बेडियों से मुक्त हो गया तो उसे मूर्ख   बनाना मुश्किल हो जायेगा. यदि एक जाति दूसरी जाति से मेल मिलाप करने लगी तो जाति के नाम पर श्रेष्ठता अर्जित करने वाले और उन पर अपनी धाक जमा कर रोजी रोटी चलाने वालों  का क्या होगा? और यही हिन्दू दुसरे धर्मों से मेलजोल और  उनसे रोटी बेटी का सम्बन्ध रखने लगा  तो, शिवसेना और विश्व हिन्दू परिषद् आदि संगठनो का क्या होगा, उनकी नेतागिरी किस दम पर चलेगी?

बाबरी मस्जिद प्रकरण के बाद हिन्दू, मुस्लमान की खाई को और अधिक गहरा किया गया है. हिन्दू को और अधिक हिन्दू और मुसलमान को और अधिक मुसलमान बनाने का कुप्रयास निरंतर जारी है. हिन्दू इसके पूर्व अपने समाज में व्याप्त बुराइयों पर खुल कर चर्चा करता था लेकिन अब अपने ही गिरेहबान में झाँकने की उसकी हिम्मत नहीं होती. हिंदुत्व पर खतरा जैसा विचार उसके मस्तिष्क में बिठा दिया गया है. इस मानसिकता का सबसे अधिक कुप्रभाव युवा पीढी पर देखने को मिल रहा है. अब तो कुछ लोग सड़ीगली परम्पराओं को फिर से स्थापित करने के लिए इन कुप्रथाओं में तर्क और वैज्ञानिकता ढूँढने का बेढंगा प्रयास करने में जुटे हैं...
हम भविष्य की पीढी के लिए कौनसा आदर्श उपस्थित कर रहे हैं आज इस बात को समझना हर प्रबुद्ध व्यक्ति की प्रथम आवश्यकता है...